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परिचय 

डॉ. रीता देव बनारस घराने की एक उद्भुत प्रतिभावान गायिका 

डॉ. रीता देव भारतीय शास्त्रीय संगीत की सम्मानीय एवं अनूठी परंपरा की संवाहिका है। यद्यपि वे बनारस घराने की एक उद्भुत प्रतिभावान गायिका है लेकिन उनकी गायकी में ग्वालियर और बनारस घराने की विशेषताओं का सुंदर संगम दिखाई देता है। डॉ. रीता का जन्म भारत के पूर्वान्तर राज्य असम के एक संगीत-प्रिय परिवार में हुआ। संगीत की प्राथमिक शिक्षा गुरू श्री निर्मल आचार्य द्वारा प्राप्त हुई। बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के उपरान्त ग्वालियर घराने से संबंद्ध प्रो0 चित्तरंजन ज्योतिषी के मार्गदर्शन में आपने संगीत विषय में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। संगीत की बारीकियों को समझने की ललक, रूचि एवं प्रेरणा उनकी सांगीतिक जिज्ञासा को एक नया आयाम देने के लिए विकल थी। वे कुछ नया सीखने के लिए गुरू की तलाश कर रही थीं। सौभाग्य से उन्हें बनारस घराने की प्रसिद्ध गायनाचार्या पद्मविभूषण श्रधेया डॉ. बिदुषी गिरिजा देवी का सान्निध्य एवं आर्शीवाद प्राप्त हुआ। उनके गुरू के प्रति अगाध विश्वास, शिष्यसुलभ जिज्ञासा, समर्पण एवं प्रतिभा को देखकर विदूषी गिरिजा देवी जी ने उन्हें गुरू-शिष्य के पारम्परिक, आत्मिक एवं आध्यात्मिक संबंध के प्रतिरूप ‘गंड-बंधन’ धर्म को आर्शीवाद के रूप में प्रदान किया। डॉ. रीता देव को बनारस घराने के स्मृतिशेष प्रसिद्ध ठुमरी सम्राट पं. महादेव प्रसाद मिश्र जी से भी उप-शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

बनारस घराने का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे देश-विदेश को आपने अपनी संगीत लहरियों से झंकृत किया। जिनमें प्रमुख संगीत कार्यक्रम है - सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव- पुणे, उत्तरपारा संगीत चक्र - कोलकाता, तानसेन समारोह-ग्वालियर, बाबा अलाउद्दीन खान संगीत सम्मेलन-मेहर, बुढ़वा मंगल समारोह-वाराणसी, संगीत नाटक अकादमी-लखनऊ, पदमश्री फड़के संगीत समारोह-धार, कजरी झुला महोत्सव-भोपाल, बनारस उत्सव-भोपाल, अमीर खुसरों संगीतोत्सव- चेन्नई, त्रिवेणी संगीत सभा-चण्डीगढ़, ताज महोत्सव-आगरा, यशराज फिल्म द्वारा प्रायोजित शाम-ए-अवध-नई दिल्ली, प्राचीन कला केन्द्र-चण्डीगढ़, इंडियन इंटरनेशनल सेन्टर-नई दिल्ली आदि।

डॉ. रीता देव आई सी सी अर के द्वारा मान्यता प्राप्त कलाकार है तथा ऑल इडिया रेडिया एवं दूरदर्शन के ‘ए’ ग्रेड कलाकार है। साथ ही वे ‘मौसिकी एक खोज’, ‘आराधना’, स्वरांजलि तथा अन्य दूरदर्शन कार्यक्रमों में एवं संगीत के अखिल भारतीय कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। आपके संगीत कार्यक्रमों की सूची में शास्त्रीय व उप-शास्त्रीय जैसे - ख्याल, ठुमरी, टप्पा, कजरी, चैती, होरी, दादरा और भजन जैसी लोकोन्मुख विधाऐं शामिल हैं।

पं. ओंकारनाथ ठाकुर पुरस्कार, ‘संगीत रत्न’, ‘स्वर-रत्न’ जैसे पुरस्कार प्राप्त कर आपने भारतीय शास्त्रीय संगीत को महिमामण्डित करते हुए अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। ख्याल, तराना, ठुमरी, कजरी, चैती, होरी, दादरा में भावपूर्ण प्रदर्शन, संगीत के लिए जुनून, विशिष्ट शैली, ईमानदारी, निरंतर नवाचार, रचनात्मक प्रयास और आलाप तान, सरगम, मूर्च्छना आदि पर अद्भुत नियंत्रण डॉ. रीता देव की गायकी को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है।

मंच प्रदर्शन के अलावा वह आगरा कॉलेज के संगीत विभाग में प्राध्यापक (प्रोफेसर) के पद पर कार्यरत हैं।

नाद ब्रह्म है और उस पर सहज संयवित नियंत्रण आध्यात्मिक साधना है। डॉ. रीता देव संगीत प्रेमियों को स्वर-साधना के माध्यम से स्वानुभूति कराती है तथा दिव्य-शक्ति से स्वयं जुड़ने एवं जोड़ने का प्रयास करती है।